निजी विद्यालयों पर अब नहीं बरसेगी माननीय की कृपा

सरकारी भूमि पर चल रहे निजी विद्यालयों की मान्यता पड़ सकती है खतरे में

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राज्य में अवैध रूप से कब्जा की गई सरकारी भूमि पर

धारा-18(4)

उत्तराखंड राज्य की स्थापना के समय से ही राज्य में तमाम निजी विद्यालय ऐसी भूमि पर संचालित हो रहे हैं ,जो या तो सरकारी भूमि पर कब्जा किए गए हैं या वन भूमि पर अतिक्रमण कर बनाए गए हैं इन विद्यालयों में अध्यनरत छात्रों कि भविष्य को देखते हुए उत्तराखंड विद्यालई शिक्षा परिषद ने इन विद्यालयों को मान्यता के नियमो को पूर्ण न करने के बाद भी मान्यता प्रदान की है ।
वैसे तो विद्यालयों को मान्यता के लिए शासन ने तमाम नियम व कानून निर्धारित किए गए हैं ।इन नियमों में प्रमुख नियम भूमि स्वामित्व का है नियम के अनुसार विद्यालय जिस भूमि पर स्थापित किया जाना है इस भूमिका मालिकाना हक या भूमि की 25 वर्षीय लीज विद्यालय के नाम होना अति आवश्यक है। इसके अलावा भी तमाम ऐसे नियम है जिनको विद्यालय स्वामी आसानी से पूर्ण नहीं कर पाते।
शासन ने इन विद्यालय में अध्यनरत छात्रों कि भविष्य को देखते हुए धारा 18(4) के तहत एक विशेष व प्रवधान किया था। जिसके तहत प्रदेश सरकार के मंत्री,सांसद,या विधायक की संशुति के बाद मान्यता परिषद द्वारा शासन को ऐसे विद्यालयों में तमाम कमियों के बाद भी उनकी मान्यता फाइल शासन को अनुमति के लिए भेज दी जाती है। शासन से मंत्री महोदय की विशेष कृपा होने के चलते शर्ते पूरी करने का समय देने की शर्त पर मान्यता दे दी जाती थी।
यहां बता दे ऐसे विद्यालय जो सरकारी या वनभूमि पर अतिक्रमण कर बने है को शासन से न तो भूमि का मालिकाना हक मिल सकता। है और न ही उन्हें 25साल की लीज।ऐसे में शासन इन विद्यालय को मान्यता की शर्ते पूरी करने को चाहे कितना भी समय क्यों ना दे दे पर यह शर्ते पूरी नही कर सकते।

शासन की इस विशेष कृपा को लेकr जन सिकायते भी मिल रही थी। जिस पर अब शासन ने ऐसे तमाम निजी विद्यालयों को मान्यता के नियमों को अब हर हाल में पूर्ण करने के आदेश जारी कर दिए है।।साथ ही
विशेष कृपा से मिलने वाली मान्यता पर भी शिकंजा कश दिया
अनु सचिव उत्तराखंड शासन
प्रेम सिंह राणा ने निर्देशक माध्यमिक शिक्षा देहरादून को पत्र लिखकर आदेशित किया है कि मान्यता प्रारूप में क्रम संख्या 1 से 14 तक उल्लिखित और उन्हें उनके साक्ष्य के अनुसार प्रस्ताव पर मानक पूर्ण नहीं किए जारहे है।वित्त विहीन मान्यता संबंधी ऐसे सभी प्रकरण जिसमें स्वयं सचिव विद्यालय शिक्षा परिषद के माध्यम से कमियां उजागर की जाती हैं और संज्ञान में कमियां उजागर होने के उपरांत भी धारा,, 18(4 )के तहत शासन को प्रस्तुत कर दिया जाता है जो उचित प्रतीत नहीं है।आदेशित किया गया है कि वित्तविहीन मान्यता के निर्धारित समस्त मानक परिषदअपने स्तर से ही पूर्ण करते हुए मान्यता समिति कीसंशुति के साथ ही प्रमाण प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराए।यानी की अब जो निजी विद्यालय मानता की सभी 14शर्ते मान्यता मिलने से पहले हो पूर्ण कर लेंगे उन्हें ही शासन से मान्यता। प्रदान की जाएगी। परिषद के सूत्रों के अनुसार जो विद्यालय वर्तमान में आधी अधूरी शर्तों के साथ मान्यता प्राप्त हैं वह भी यदि समय रहते शर्तों का पालन नहीं करेंगे तो उनकी भी मानता नियत की जा सकती है।

बिंदुखाता,रुद्रपुर के तमाम स्कूल होंगे प्रभावित,:::
परिषद के सूत्रों की माने तो शासन के इस आदेश का सबसे ज्यादा असर नैनीताल जनपद के बिंदु कथा उधम सिंह नगर जनपद के रुद्रपुर व पर्वतीय जनपदों में वन भूमि पर संचालित हो रहे विद्यालयों की मान्यता पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।

विद्यालयों को नोटिस जारी,::::: उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी नवीन घिल्डियाल के अनुसार जिन विद्यालयों ने शासन की विशेष कृपा के तहत आधी अधूरी शर्तो। के तहत मान्यता प्राप्त की है उनको नोटिस जारी कर शर्ते समय पर पूर्ण करने की बात कही गई है यदि यह विद्यालय समय पर शर्तें पूरी नहीं करते तो उनकी मान्यता समाप्त की जा सकती है
शासन का आदेश मिलने के बाद विद्यालय परिषद ने जिन विद्यालयों में मान्यता के शर्तें आधी अधूरी हैं उन सभी को नोटिस जारी कर दिया गया है यदि निर्धारित समय यह विद्यालय मानता की शर्तें पूर्ण नहीं करते हैं तो उनकी मान्यता निरस्त कर दी जाएगी ।